Pranamya Sagar
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11. आचार्य भक्ति भावना (सोलहकारण भावना)

pravachanNov 03, 2025

Audio आचार्य भक्ति भावना निज आतम उद्धार हेतु जो, साधु बने हैं भावों से साथ-साथ जग का कल्याणक, बने सूरि सद्भावों से। स्वयं पुण्य से बने, पुण्य से, लाभ मिले आचारज का भव वैतरणी पार करन को, नाव मिली फिर अचरज क्या॥1॥ --o-- जो जन्म-जन्म के पुण्य भविक जन, जब संचित कर लेते हैं गुण-गण भर…