Pranamya Sagar
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5. संवेग भावना (सोलहकारण भावना)

pravachanOct 30, 2025

Audio संवेग भावना श्री जिनधर्म अतिविशुद्ध है, कर्म नाश का कारण है पुण्य फलों को देने वाला, निःश्रेयस सुख धारण है। इसका सेवन करने से जो, भवि जन मन में हर्ष धरे निश्चित ही संवेग भावना, जीवन में निर्वेग भरे॥1॥ --o-- काल अनादि से यह आतम, कर्म बन्ध से सहित रहा नहीं हुआ उत्पन्न किसी स…