Pranamya Sagar
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15. मार्ग प्रभावना भावना (सोलहकारण भावना)

pravachanNov 04, 2025

Audio मार्ग प्रभावना भावना रत्नत्रय ही मोक्षमार्ग है, मारग अन्तर आतम का इसको प्राप्त करे जो रुचि से, तिमिर भगाए आतम का। भव्य वही जो इस मारग पर, हो आरूढ़, वही राही उसी भरोसे मोक्षमार्ग की, नित होती है बड़वाही॥1॥ --o-- सम्यक् दर्शन-ज्ञान-चरण को, जो नित ध्याता ध्यानी है औरों को उपद…