Pranamya Sagar
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14. आवश्यकापरिहाणी भावना (सोलहकारण भावना)

pravachanNov 03, 2025

Audio आवश्यकापरिहाणी भावना श्रमण वही जो षट् आवश्यक, पाल रहा है निज रुचि से धर्म क्रिया के वशीभूत है, मन-वच-तन त्रय की शुचि से। आवश्यक में हानी करना, धर्म हानि जो जान रहा उसके द्वारा ही आवश्यक, पूर्ण हुए श्रुतगान रहा॥1॥ --o-- आवश्यक हैं छह प्रकार के, परम श्रमण इनको साधे रत्नत्रय…