Pranamya Sagar
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12. बहुश्रुत भक्ति भावना (सोलहकारण भावना)

pravachanNov 03, 2025

Audio बहुश्रुत भक्ति भावना जो सिद्धांत महाशास्त्रों का, पार पा लिए, सरलमना फिर भी आत्म प्रशंसा बिन हैं, श्रुत भक्ति से शुद्धमना। कर्म निर्जरा कारण पढ़ते, और पढ़ाते भविजन को बहुश्रुतधारक पाठक मुनि को, वन्दन है मतिवर्धन हो॥1॥ --o-- शास्त्र ज्ञान के भाव ज्ञान से, शीतल जल से नहा रहे…